भइया आपको आपका   २८   वां जनम दिन    बहुत    बहुत      मुबारक !
आपको आपके २८ वे जन्म दिन की बहुत बहुत हार्दिक सुभ कामनाये !

(प्रत्येक व्यक्ति का जीवन में कोई ना कोई आदर्श जरूर होता है 
जिसके अनुशरण    से   ही   वह  सफलता की सीडी चढ़ता   है I
ठीक वैसे ही मेरे जीवन का सबसे बड़ा आदर्श  मेरे बड़े  भाई है I
जिनके अनुशरण से ही मुझे जीवन में हमेशा आगे बढ़ाने की प्रेरणा मिलती रहती है, 
और  में    निरंतर  आगे    बढता  रहता    हूँ   चाहे   परिस्तिथि   कोई   भी रही हो I
आज मैं  मेरे बड़े भाई वीर भाइया को  २८ वें  और टीकम भइया को उनके २५  वे जन्म दिन पर  एक छोटी सी  कविता व वाक्यांश लिख रहा हूँ  क्यूंकि मेने अपने  बड़े भाइयों  से ही जीवन जीना सीखा है ,मेरे बो महान आदर्श  हैं  I ) चतुराई 
बचपन  और बड़ा वाला हैप्पी बर्थडे  वीर वीर भइया 
(भाई आप ही तो हो )
                                                                   (मेरे बो महान आदर्श )
जिनकी लोरी सुनकर मेने  बचपन में सोना सीखा 
जिनकी उंगली पकड़कर बचपन में चलना सीखा 
जिनके दुखों को देखकर दुखों में संभलना  सीखा 

जिनकी अपने   छोटे भाइयों  को महत्व  देने की  प्रवति से,
मेंने   "अपने  तो  अपने ही   होते  है " बाक्य का  अर्थ   जाना 
जीनके उच्च विचारों  से  विचारों में उच्चता का महत्व  जाना 

जिनके अनुभव के दम पर  मेने दुनिया का दम  जाना 
जिनके हमेशा साथ रहक़र , खुद की ताकत को  जाना 

भाई आप दोनों ही तो जिनकी, हर परिस्थिति  में अपनों के  
साथ रहने त की  आदत से  मेने अपनों का   महत्व  जाना  

 भाई आप ही तो हो...... मेरे बो महान आदर्श

जिनके  उत्तम व्यवहार को देखकर मेने  व्यावहारिक बनना  सीखा और जिनकी डांट से पथ पर बने रहना 
जिनके श्रेठ नेतृत्व ही  से मेने खुद का  नेतृत्व  करना सीखा और सहनशीलता को देखकर हमेशा सहनशील रहना 

भाई आप ही तो हो......मेरे बो महान आदर्श

जिनकी तुफानो (दुःख) में भी संघर्ष  करते हुए डेटे  रहने की  आदत ने मुझे एक  अविरल तूफान बनाया 
जिनके क्षमा करने की आदत ने  मुझे क्षमाशील बनाया
जिनके संगठन के मंत्र में मुझे संगठन में रहना सिखाया 
जिनकी अपनों को कभी अकेले ना  छोड़ने  की  आदत ने मुझे हमेशा  अपनों  के  साथ  रहना  सिखाया 

भाई आप ही तो हो......मेरे बो महान आदर्श

जिनको  फटे  कपड़ों पर तुरपन (सिलाई न दिखे ) करते देख, सम्बंंधो को तुरपना सीखा  जिससे किसी को पता 
भी न चले और सम्बन्ध मजबूत बने रहे I
( याद  है जब आप हमारे फटे  कपड़ों  पर तुरपन करते थे तो  कई बार सुई उंगली पर  गुस्ताखी कर जाती  और  आपकी उंगली को भेद देती थी  लेकिन जब उंगली से निकले हुए खून और उस दर्द के बीच सुई धागे से तुरपन  का कमाल होता था  तो दर्द में भी आपकी ख़ुशी का ठिकान नहीं रहता था  आप आज भी ठीक वैसे ही  है क्योकि  परिवार में संबंधों  पर  जब कोई  मुसीबत आती है  तो उसे आप एक फटे  कपडे पर तुरपन लगाने से ज्यादा नहीं समझते और गुस्ताखी , दुःख  व दर्द ,  उठाते हुए  अपने संबंध बच  टूटने से बच जाएँ  बस इस  बात को ध्यान में रखकर तुरपन जैसे महीन प्रयास करते हैं  लेकिन खुद के दुःख दर्द का जरा भी ख्याल नहीं करते )   (भैया में आप दोनों को  बताना  चाहता  हूँ की यही  तो  महान मष्तिष्क के लक्षण है  जो आपके  पास हैं )

भैया मुझे आज भी भली भांति  याद है की  आप ने ही  तो कहा था की  बुराई ,दुखों का सामना करते हुआ भी अपने संबंधों को टूटने से बच लेना ही एक श्रेष्ठ पुरुष  का गुण होता है I वह गुण  आपमें स्पष्ट दीखता है I

पता नहीं आप मुझे (5.5 फ़ीट को )कैसे दोने हाथों में समेट    लेते       हो     क्यूंकि 
मेंरे सिर पे  भी आपके  हाथ हमेशा  रहते  हैं और  मेने पग पग आपके हाथों पे भी चला है I

आपके इस विराट शरीर व विराट ह्र्दय विराट समर्पण भाव  को सत  सत  नमन 


भाई आप  दोनों (वीर ,टीकम भाई ) ही तो हो जिनकी  सहनशीलता , स्थिरता , सहचरिता , शिष्टचरिता व जोड़ी  और जिनका   चरित्र , व्यबहार , संघर्ष , व अपनापन ,  मेरे लिए दुनिया में अदुतीय (दूसरा नहीं )हैं 
आप  उस अथाह कुए सामान हो जिसको  दुनिया सींचती है  पर फिर  भी कभी  कम नहीं  होता 
आप  उस  अथाह सागर सामान हो जो  हजरों नदियों के मिलने से भी नहीं  उफनता